नई दिल्ली- संसद में छात्रों से जुड़े मुद्दे और अन्य मांगों को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के निकट लोक कल्याण मार्ग पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई कांग्रेस सांसद शामिल हुए। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कांग्रेस के समर्थन में प्रदर्शन में पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई सांसदों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को कापसहेड़ा पुलिस स्टेशन ले जाया गया। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया गया।
इस बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस नेताओं से बातचीत की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदर्शन ऐसे स्थान पर किया जा रहा था, जो विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं है और इससे आम लोगों को परेशानी हो रही थी। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया।
कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, गृह मंत्री के संसद के दोनों सदनों में बयान, पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा, छात्रों की चिंताओं को सुने जाने और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग शामिल है।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने कहा कि संसद में विपक्ष की आवाज नहीं सुनी जा रही है, इसलिए सांसदों को सड़क पर उतरना पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। भाजपा सांसद समीक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह केवल सुर्खियां बटोरने के लिए प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन उसके लिए निर्धारित नियमों और स्थानों का पालन करना भी आवश्यक है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस इसे छात्रों और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे संसदीय कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास बता रही है।

