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पेपर लीक का मुद्दा अब केवल छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं. संसद, विपक्ष, सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच राष्ट्रीय बहस का विषय..

सरकार ने विपक्ष पर लगाया छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप

नई दिल्ली। देशभर में परीक्षा पत्र लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक सियासत तेज हो गई है। एक ओर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार संसद में इस विषय पर हर पहलू पर चर्चा के लिए तैयार है। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों पर कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय करने और सरकार से छात्रों से माफी मांगने की मांग दोहराई। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

जेपी नड्डा ने कहा कि छात्रों द्वारा उठाया गया पेपर लीक का मुद्दा गंभीर है और इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार एक जिम्मेदार सरकार है और हर सवाल का जवाब तथ्यों और जांच के आधार पर जनता के सामने रखेगी। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें पिछले दस वर्षों में 150 से अधिक पेपर लीक की बात कही गई थी।

नड्डा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जहां कांग्रेस या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता से सवाल किया कि वे केवल केंद्र सरकार को ही क्यों निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार विपक्ष का उद्देश्य छात्रों का हित नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है।

उन्होंने कहा कि सरकार संसद में इस विषय पर कम अवधि या लंबी अवधि की चर्चा, जितने समय की विपक्ष मांग करेगा, उसके लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से “गोल पोस्ट न बदलने” की अपील करते हुए कहा कि संसद इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने का सबसे उपयुक्त मंच है। नड्डा ने कहा कि देश के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना सरकार और विपक्ष दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

इधर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों की पहली और सबसे जायज मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की है क्योंकि वे शिक्षा मंत्री के रूप में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा पत्र लीक हो रहे हैं और मंत्री इस पूरी व्यवस्था को संभालने में असफल साबित हुए हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि दूसरी मांग उन अधिकारियों और लोगों की जवाबदेही तय करने की है जिन्होंने छात्रों पर कार्रवाई करवाई। तीसरी मांग यह है कि सरकार और जिम्मेदार नेतृत्व छात्रों से माफी मांगे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया गया है और कांग्रेस छात्रों के आंदोलन का पूरा समर्थन करती है।

राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को महंगा बताते हुए कहा कि सरकार शिक्षा पर भारी खर्च का दावा करती है, लेकिन दूसरी ओर छात्रों और उनके परिवारों पर परीक्षाओं का आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना लगातार कठिन होता जा रहा है और शिक्षा के बाद रोजगार की गारंटी भी नहीं मिल रही।

लोकसभा में राहुल गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आखिर क्यों पीटा गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं और यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा बेहद गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रधानमंत्री आवास तक इसलिए गया क्योंकि जब छात्र सड़कों पर हैं तो विपक्ष का भी उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में इस विषय पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष की स्पष्ट मांग है कि पहले धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और उसके बाद छात्रों की मांगों पर अमल किया जाए। उन्होंने कहा कि 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है और यह किसी एक दल का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का मुद्दा है।

इस बीच, अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो ने मेदांता अस्पताल के बाहर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है और सांसदों को सोनम वांगचुक से मिलने नहीं दिया जा रहा। उनके अनुसार यदि सरकार वास्तव में चाहती है कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त करें तो उन्हें शांत वातावरण और सांसदों से मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए।

उधर, आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि सरकार से बातचीत तभी होगी जब वह किसी तटस्थ स्थान पर आयोजित की जाएगी, न कि किसी मंत्री के आवास पर। CJP ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया और केवल आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया। संगठन ने यह भी कहा कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पेपर लीक का मुद्दा अब केवल छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद, विपक्ष, सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। सरकार जहां संसद में व्यापक चर्चा और समाधान की बात कर रही है, वहीं विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन जवाबदेही तय करने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों के साथ न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं।

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